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वायु प्रदूषण से स्माग का संकट – एक गंभीर चेतावनी

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FB IMG 1767612463821सागर/वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *भारत आज तेजी से विकास की राह पर है, लेकिन इसकी एक भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। देश के कई शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार शामिल हो रहे है। वायु प्रदूषण न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। वायु प्रदूषण तब होता है जब हवा में हानिकारक गैस, धूल कण और रासायनिक पदार्थ इस मात्रा में मिल जाते हैं कि वे जीव-जन्तुओं और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने लगते हैं। इनमें प्रमुख रूप में कार्बनमोनो ऑक्साइड, सल्फर डायऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड हवा में मिल जाते हैं। भारत में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं (1) वाहनों से निकलने वाला धुआँ – पेट्रोल और डील से चलने वाले वाहनों की संख्या में वृद्धि।2) औद्योगिक प्रदूषण – कारखानों और बिजली संयंत्रणों से निकलने वाली जहरीली गैस।(3) पराली जलाना – किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण अधिक बढ़ जाता है।(4) निर्माण कार्य और धूल – सड़कों, इमारतों और बुनियादी ढाँचे के निर्माण से उड़ने वाली धूल।(5) घरेलू ईंधन – ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी, कोयला और गोबर के उपलों का उपयोग। मनुष्य के स्वास्थ पर वायु प्रदूषण के कई दुष्प्रभाव होते हैं, जैसे श्वसन रोग, अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता जा रहा है। बच्चों पर इसका अत्यधिक प्रभाव हो रहा है, जैसे फेफड़ों का अधूरा विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी। गर्भवती महिलाओं पर समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले कमजोर शिशु जैसे खतरनाक दुष्प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से आँख, नाक व त्वचा में जलन जैसी गंभीर बीमारियाँ भी बढ़ती हैं। पर्यावरण एवं जलवायु पर भी प्रदूषण का प्रभाव पड़ता है। ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि, अम्लीय वर्षा (ऐसीडरेन), जिससे मिट्टी और जल स्त्रोत दूषित होते हैं। वनस्पतियों को भी नुकसान होता है, जैसे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है और जैव विविधता में भी कमी आ रही है। वायु प्रदूषण के कई आर्थिक और सामाजिक कारण होते हैं, जैसे स्वास्थ सेवाओं पर व्यय अधिक बढ़ता है, काम करने की क्षमता घटती है और उत्पादकता कम होती है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गरीब और कमजोर वर्ग इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं। वायु प्रदूषण भारत के लिए एक मूक आपदा बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये तो इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं। सरकार, उद्योग, किसान और आम नागरिक – सभी को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजना होगा। स्वच्छ हवा केवल एक अधिकार नहीं है, बल्कि स्वस्थ्य और सुरक्षित भविष्य की आवश्यकता है। ‘स्मॉग’’ के कारण व प्रभाव – ‘‘स्मॉग’’ शब्द ‘‘स्मोक (धुआँ)’’ और ‘‘फाग (कोहरा)’’ से मिलकर बना है। तेजी से बढ़ी जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने पर्यावरण पर समस्याओं का गंभीर रूप ले लिया है। आज भारत में ‘‘स्मॉग’’ सबसे भयावह समस्याओं में से एक बन चुकी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर जैसे महानगर अक्सर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गिने जाते हैं। भारत में सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने से हवा की गति धीमी होने के कारण ‘‘स्मॉग’’ जैसा धुंध लम्बे समय तक वातावरण में उपस्थित रहता है। ‘‘स्मॉग’’ मुख्यतः दो प्रकार का होता है –
1. सल्फ्यूरस स्मॉग – जो कोयला और औद्योगिक ईंधन जलने से बनता है।2. फोटो केमीकल स्मॉग – जो सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वाहन उत्सर्जन से बनने वाली गैसों की रासायनिक प्रतिक्रिया से उत्पन्न होता है।भारत सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई योजनाओं को क्रियान्वित किया है – जैसे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम, वी.एस.-6 उत्सर्जन मानक, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, ग्रीन एनर्जी और सौर ऊर्जा मिशन। किन्तु स्मॉग की समस्या का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। नागरिकों की भी पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी है, जैसे निजी वाहन का कम उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन अपनाना, ऊर्जा की बचत करना, कचरा नहीं जलाना, वृक्षारोपण करना और पर्यावरण के प्रति जागरूक होना।
उच्च वायु गुणवत्ता सूचकांक (ए.क्यू.आय.) का मतलब है कि हवा में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है, जिससे सम्वेदनशील लोगों (बच्चे, बुजुर्ग) को सांस लेने में तकलीफ और सामान्य लोगों को भी घर से बाहर कम समय बिताने की सूचना दी जाती है। जब ए.क्यू.आय. खतरनाक या बहुत खराब श्रेणी में होता है तब आपातकाल स्थिति बन जाती है। भारत के कई शहरों में 200 से 300 तक ए.क्यू.आय. होने से जनस्वास्थ्य का जोखिम बढ़ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक इन दिनों लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। स्वच्छ हवा और स्वच्छ जीवन के लिए ‘‘स्मॉग’’ से लड़ना हम सभी का कर्तव्य है। स्मॉग का असर केवल स्वास्थ और पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवहन व्यवस्था विशेषकर हवाई एवं रेल यातायात पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। स्मॉग के कारण दृश्यता (विजिविलिटी) बहुत कम हो जाती है, जिससे कई बार उड़ानों की लैंडिंग और टेकऑफ में देरी होती है या उन्हें उड़ानों को रद्द करना पड़ता है, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। ‘‘स्मॉग’’ का असर रेल और सड़क परिवहन पर भी पड़ता है। सड़कों पर दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। कई बार हाईवे और एक्सप्रेसवे पर स्मॉग के कारण एक्सीडेंट अधिक हो जाते है। रेल सेवाओं में भी ट्रेनों की रफ्तार कम कर दी जाती है, जिससे ट्रेन कई घंटों तक देरी से पहुँचती है। व्यापार, पर्यटन और आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दैनिक सेवाओं पर भी इसका असर पड़ता है, स्मॉग के कारण एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपात सेवाओं की आवाजाही में भी बाधा आती है। कम दृश्यता और खराब वायु गुणवत्ता के कारण इन आपात सेवाओं में बाधा पड़ने की वजह से गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है। स्पष्ट है कि स्मॉग एवं खराब वायु गुणवत्ता का प्रभाव बहुआयामी है। यह न केवल हमारे स्वस्थ्य एवं पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि परिवहन व्यवस्था और देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है। इसलिए हम सभी को इसको नियंत्रित करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपाय अपनाना अत्यन्त आवश्यक है। आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना हम सबका दायित्व है। प्रदूषण से लड़ने के लिए हमें खुद को छोटे-छोटे प्रयास करने होंगे। हम अपने बच्चों को शुरु से ही अच्छी आदतें सिखायें, जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। पेड़ हमें शुद्ध हवा देते हैं और प्रदूषण कम करते हैं। बच्चों को पौधा लगाना, उसे नाम देना और रोज पानी देना सिखायें, इससे उनमें प्रकृति के प्रति प्रेम बढ़ेगा। हम प्लास्टिक का कम उपयोग करें, कपड़े या जूट के बेग का इस्तेमाल करने की आदत डालें। घरों में बिजली व पानी की बचत करें, कमरे से बाहर जाते समय लाईट-पंखा बंद करें और नल को खुला ना छोड़ें। संसाधनों की बचत भी प्रदूषण को कम करने का एक तरीका है। छोटी दूरी के लिए गाड़ी की जगह पैदल या साईकिल चलाना सीखें, जिससे वायु प्रदूषण कम होगा एवं शरीर भी स्वस्थ्य रहेगा। कचरा ना जलायें, साफ-सफाई की आदत डालें और खुद एक उदाहरण बनें – अगर हम जिम्मेदार बनेंगे, तो हमारे बच्चे भी खुद सीखेंगे। प्रदूषण से लड़ने के लिए बड़े कदम नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों की आवश्यकता है। अगर आज हम अपने बच्चों को सही दिशा देंगे, तो कल वे धरती को सुरक्षित रखेंगे
स्मॉग एवं वायु प्रदूषण के समाधान एवं रोकथाम के लिए कई उपाय अपनाना होंगे जैसे सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना। नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों का उपयोग करना जैसे सौर और पवन ऊर्जा। पराली जलाने के विकल्प किसानों को उपलब्ध कराना। हरित क्षेत्र और वृक्षारोपण को बढ़ाना। कठोर पर्यावरणीय कानूनों का पालन करना। जनजागरूकता जैसे लोगों को खतरे के बारे में शिक्षित करना। ‘‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ्य जीवन – यही हमारे भविष्य की पहचान है।’’ डॉ. नीलिमा पिम्पलापुरे लेखिका, शिक्षाविद समाजसेवी

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